सफरनामा----------------

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सफरनामा
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उलझें उलझे हालात मेरे,
कहानी जाने क्या होगा ,
राहे जिसकी मालूम नही
सफ़र अंजामे क्या होगा ।

         लहरे टकराती जब साहिल से
          जी मे कसक इक उठती है ,
          कश्तियां परवान जो चढ़ रही
          उतार न जाने क्या होगा ।

सोई धड़कन आबाद हो रही
अजब बदहवासी का आलम है , 
कोरे पन्ने पलट रही हु
अल्फाज़ न जाने क्या होगा ।

*जयप्रखर*

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