मुझे इंसान रहने दो - श्वेता राय 'कनक '
मेरी कमियों को बनकर मेरी पहचान रहने दो
फरिश्ते आप बन जाओ, मुझे इंसान रहने दो
उम्मीदें जिंदगी भर दुःख ही देती हैं जमाने को
उम्मीदें भूल कर रिश्तों में थोड़ी जान रहने दो
सहारा बनना हो तो हांथ थामो जिंदगी भर को
घड़ी भर साथ चलने का तेरा एहसान रहने दो
'कनक' तुम जाओ बेशक तोड़कर संबंध मुझसे पर
सुलह की कोई सूरत कोई तो इमकान रहने दो।
-कनक
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चित्र साभार:- अंबिका शरण राय

