विद्याधर राय 'विद्यार्थी ' राम और कृष्ण की नगरी को संवारने वाले बेमिसाल अधिकारी हैं, गौरव दयाल कमिश्नर अयोध्या

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विद्याधर राय 'विद्यार्थी '

राम और कृष्ण की नगरी को संवारने वाले बेमिसाल अधिकारी गौरव दयाल   

लखनऊ । ईश्वर भी अपने कार्य के लिए कुछ विशेष व्यक्तियों को चुनते हैं। सेवाकाल में बहुत कम अधिकारियों को दो बड़े धार्मिक स्थलों की सूरत संवारने का 'गौरव' मिल पाता है। ऐसे बिरले अफसर हैं 2004 बैच के IAS और अयोध्या के कमिश्नर गौरव दयाल। पिछले साल अयोध्या ट्रांसफर होने से पहले कृष्ण नगरी मथुरा के लिए वे एक बड़े कार्य की नींव तैयार कर गए, जो आने वाले समय में न केवल मथुरा की तकदीर बदल देगा, बल्कि बतौर अफसर उन्हें इतिहास में भी दर्ज करेगा।

काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल की तरह मथुरा में भी जिस भव्य कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ है, उसका सबसे पहला प्रस्ताव गौरव दयाल ने अलीगढ़ कमिश्नर रहते दिया, तो योगी सरकार ने तुरंत मंजूर किया था। बात पिछले साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की है। बांके बिहारी मंदिर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगदड़ से 2 दर्शनार्थियों की मौत और दर्जनों घायल हुए तो प्रदेश में खलबली मच गई। अतीत में भी दम घुटने से कुछ श्रद्धालुओं की मौत की घटनाएं हो चुकीं थीं। हादसे पर गंभीर हुई योगी सरकार ने जांच के लिए अलीगढ़ कमिश्नर गौरव दयाल और पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के नेतृत्व में कमेटी गठित की। भविष्य में ऐसे किसी हादसे को रोकने के लिए व्यवस्था सुझाने की जिम्मेदारी कमेटी को मिली।

सुलखान सिंह और गौरव दयाल की कमेटी ने जांच में पाया कि वर्ष 1864 में स्थापित श्रीबांके बिहारी मंदिर परिसर के चौक का एरिया सिर्फ 48 बाई 48 फुट का है, जहां एक साथ सिर्फ 1000 श्रद्धालु ही दर्शन कर सकते हैं, जबकि शनिवार और रविवार को दर्शन करने आने वालों की संख्या एक लाख के पार होती है। जन्माष्टमी जैसे विशेष त्योहारों पर तो 5 से 50 लाख श्रद्धालु एक दिन में यहां आ जाते हैं। लिहाजा प्रशासन चाहकर भी भीड़ कंट्रोल नहीं कर सकता। तब गौरव दयाल ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कॉरिडोर बनाने की शासन से सिफारिश की। योगी सरकार ने प्रस्ताव पास कर दिया।

जिस तरह बनारस में कॉरिडोर का शुरुआत में भारी विरोध हुआ, लेकिन बाद में फायदा समझ आने पर स्वागत हुआ, उसी तरह मथुरा में भी मंदिर के आसपास रहने वालों ने कॉरिडोर के प्रस्ताव का भारी विरोध किया। मामला हाई कोर्ट तक जा पहुंचा। एक साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार बीते दिनों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी प्रस्ताव को जनहित में मानते हुए हरी झंडी दी। 5 एकड़ में बनने वाले मथुरा कॉरिडोर से बांके बिहारी मंदिर में एक साथ 10 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने मथुरा का दौरा किया, उससे स्पष्ट संकेत हैं कि अयोध्या, काशी के बाद अब मथुरा के दिन बहुरने वाले हैं।

साभार - नवनीत मिश्रा

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